साहेबान! लखनऊ अब UNESCO का ‘Creative City of Gastronomy’

साक्षी चतुर्वेदी
साक्षी चतुर्वेदी

भारत की तहज़ीब और ज़ायके का दिल — लखनऊ — अब वैश्विक मंच पर चमक उठा है। UNESCO ने इसे Creative City of Gastronomy का दर्जा दिया है, यानी अब नवाबी शहर की बिरयानी, कबाब और पराठे सिर्फ़ भारत नहीं, दुनिया के स्वाद का हिस्सा बन गए हैं।

UNESCO ने क्यों दिया यह सम्मान?

लखनऊ के खानपान में सिर्फ़ स्वाद नहीं, बल्कि सदियों की संस्कृति, सूफियाना तहज़ीब और गंगा-जमुनी विरासत का मेल है। इस मान्यता के साथ, लखनऊ अब 50 से अधिक देशों के “UNESCO Creative Cities Network” का हिस्सा बन गया है।

पीएम मोदी ने कहा — लखनऊ आएं, स्वाद का संसार देखें!

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स (X) पर लिखा,

“लखनऊ एक जीवंत संस्कृति का प्रतीक है, जिसकी आत्मा उसकी पाक परंपरा में बसती है। UNESCO ने इसे सम्मानित किया है, यह पूरे भारत के लिए गर्व की बात है।”

संस्कृति और पर्यटन को मिलेगा बूस्ट

केंद्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने कहा —

“यह सम्मान लखनऊ की वैश्विक पहचान को और मज़बूत करेगा। अब यह शहर संस्कृति आधारित पर्यटन, आर्थिक विकास और अंतरराष्ट्रीय सहयोग का नया केंद्र बनेगा।”

लखनऊ की रसोई क्यों है यूनिक?

गलौटी कबाब से लेकर शीरमल तक, हर डिश एक कहानी है। नवाबी दौर की शाही रेसिपी आज भी ज़िंदा परंपरा का हिस्सा हैं। यहां का खाना सिर्फ़ स्वाद नहीं, बल्कि कला, इतिहास और मोहब्बत का मेल है।

अब UNESCO भी बोलेगा — “टेस्ट में बेस्ट, लखनऊ दा रेस्ट!”
और जो अभी तक सिर्फ़ Awadhi Cuisine सुनते थे, अब उन्हें मिलेगा इसका इंटरनेशनल वर्ज़न — UNESCO-Approved Thali!

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